Following details will be shared with the tutors you will contact:
Confirm to delete
Are you sure want to delete this?
Ashutosh Kumar ChoudharyPhd scholar ksdsu, Darbhanga
No reviews yet
मैं अपने हर कार्य को समय पर पूरा करता हूँ। आज तक मैं जहां-जहां शिक्षण का कार्य किया हूँ। वहां पर विद्यार्थियों का जिम्मेदारी मेरी जिम्मेदारी होती है। जब तक शिक्षक विद्यार्थियों की जिम्मेदारी को खुद की जिम्मेदारी नहीं समझेंगे तब तक शिक्षक सही से शिक्षण कार्य नहीं कर सकता है। आज के समय में शिक्षक प्रणाली छात्र केंद्रित हो गई है जिसमें छात्र को केंद्र में रखकर छात्रों का सर्वांगीण विकास किया जाता है। भतृहरी जी अपने नीतिशतक ग्रंथ में लिखते हैं- विद्या नाम नरस्य रूपमधिकं प्रच्छन्नगुप्तं धनम्, विद्या भोगकरी यशःसुखकरी विद्या गुरूणां गुरुः। विद्या बन्धुजनो विदेशगमने विद्या परा देवता, विद्या राजसु पूजिता नहि धनं विद्याविहीनः पशुः।"
अर्थ 1. विद्या मनुष्य का सच्चा रूप है और सबसे बड़ा धन है। 2. विद्या सुख, यश और भोग का कारण बनती है। 3. विद्या गुरु की भी गुरु है। 4. विद्या विदेश में भी साथ देती है। 5. विद्या परम देवता है और राजाओं द्वारा पूजित है। 6. विद्या के बिना व्यक्ति पशु के समान है।
Subjects
Sanskrit shloka Masters/Postgraduate
Sanskrit (Slokas chanting for primary classes) Grade 8
Experience
TEACHER (Feb, 2023–Present) at Laxmiwati gurukul, sarisab pahi, Madhubani
Teaching
Education
M.A SANSKRIT (Jan, 2020–Jun, 2022) from Banaras Hindu University, Varanasi–scored 82%